सम्यक् भाषा संस्कृत भाषा-डाॅ. रीतेष व्यास

महाविद्यालय में संस्कृत दिवस कार्यक्रम उत्साह व जोष के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ माता सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। डाॅ. श्यामा पुरोहित (निदेषिका), डाॅ. रीतेष व्यास (प्राचार्य), डाॅ. बलदेव व्यास (संस्कृतविभागाध्यक्ष) ने पूजन अर्चन किया। सरस्वती वंदना गायत्री, रीमा, मुस्कान, आरती, बिन्दू ने प्रस्तुत की। पत्रवाचिका के रूप में ’’ऋण त्रय’’ विषय पर मुस्कान व्यास ने पत्र-वाचन करते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए। सभ्य समाज के निर्माण में ’’ऋण त्रय’’ को साधन बताया तथा यह कहा की उत्तरदायी व चरित्रवान् संतानों से ही सभ्य समाज का निर्माण होगा। डाॅ. बलदेव व्यास ने संस्कृत भाषा को विष्वभाषा के रूप में प्रस्तुत किया । संभाषण को महत्त्व देते हुए ’’भाषा भाषणेन आयाति’’ कहा। हिन्दी विभागाध्यक्षा डाॅ. श्यामा पुरोहित ने संस्कृत भाषा की प्राचीनता व सर्वभाषा जननी के रूप को उपस्थापित किया। साथ में भाषा-विज्ञान के गूढ़ रहस्यों को भी रखा। श्री ब्रह्मदत्त व्यास (अंग्रेजी भाषा विभागाध्यक्ष) ने संस्कृत भाषा को चरित्र निर्मात्री भाषा कहा। प्राचार्य डाॅ. रीतेष व्यास ने इतिहास विषय में संस्कृत भाषा को ही इतिवृत्त लिखने की परम्परा के रूप में प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होनें कहा सम्यक् भाषा ही संस्कृत भाषा है। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय छा़त्रा सुश्री रीमा आचार्य ने सफलता पूर्वक किया। महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण व छात्राओं ने कार्यक्रम में उत्साह से भाग लिया।